वायुदाब Vayudab

वायुदाब

वायुदाब की परिभाषा, समदाब रेखा (ISOBAR), वायुदाब पेटियां, विषुवत रेखीय, भूमध्यरेखीय, उच्च एवं निम्न वायुदाब पेटियां, ध्रुवीय पेटियां आदि की पूर्ण जानकारी

पृथ्वी के चारों ओर फैला वायुमंडल अपने भार के कारण पृथ्वी के धरातल पर जो दबाव डालता है उसे वायुमंडलीय दाब या वायुदाब कहते हैं

सागर या स्थल के प्रति इकाई क्षेत्र में वायु जो भार डालती है उसे वायुदाब कहते हैं।

वायुदाब का अध्ययन सर्वप्रथम ऑटोफिन ग्युरिक ने किया।

बैरोमीटर/फोर्टिन बैरोमीटर/नीद्रव बैरोमीटर/साधारण वायुदाब मापी नामक यंत्र से वायुदाब को मापा जाता है।

वायुदाब मापने की इकाई मिलीबार/पास्कल/किलोपास्कल है।

समुद्र तल पर पृथ्वी का औसत वायुदाब 1013.25 मिलीबार/किलोपास्कल (KP) होता है।

धरातल से ऊपर जाने पर प्रत्येक 10 मीटर की ऊंचाई पर एक मिली बार की दर से वायु दाब घटता जाता है।

पवने उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर चलती है।

सूत्र = Pα1/T

P = दाब

T = तापमान

α = समानुपती

सबसे अधिक वायुदाब इर्किटस्क (साइबेरिया) 1075.2 मिलीबार है।

धरातल से प्रत्येक 165 मीटर की ऊंचाई पर 1 डिग्री सेंटीग्रेड की दर से तापमान घटता है इसे सामान्य ताप ह्रास ताप पतन की दर कहते हैं।

समदाब रेखा (ISOBAR) – वायुदाब, परिभाषा, पेटियां, ISOBAR

सागर तल पर समान वायुदाब वाले क्षेत्रों को मिलाने वाली रेखा समदाब रेखा कहलाती है।

वायुदाब पेटियां

ग्लोब पर सात वायुदाब पेटियां बनती हैं जिनके चार प्रकार होते हैं।

इनमें से उत्पत्ति की प्रक्रिया के आधार पर वायुदाब की पेटियों को दो वृत्त समूहों में विभाजित किया जाता है-

1 तापजन्य- यह दो प्रकार की हैं-

i विषुवत रेखीय/भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब पेटी

ii ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी

2 गतिजन्य- भी दो प्रकार की होती हैं-

i उपोषण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी या घोड़े का अक्षांश (अश्व अक्षांश)

ii उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी

वायुदाब परिभाषा पेटियां ISOBAR
वायुदाब परिभाषा पेटियां ISOBAR

1- विषुवत रेखीय/भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब पेटी

इस पेटी का विस्तार भूमध्य रेखा के 5 डिग्री उत्तर से 5 डिग्री दक्षिण अक्षांशों तक विस्तृत है।
यहां वर्षभर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं।
अतः तापमान सदैव ऊँचा तथा वायुदाब कम रहता है।
भूमध्य रेखा पर पृथ्वी का घूर्णन वेग सर्वाधिक होता है।
जिससे यहां अपकेन्द्रीय बल सर्वाधिक होता है।
यहां जलवाष्प की अधिकता तथा वायु का घनत्व कम रहता है।

इस क्षेत्र में धरातल पर हवाओं में गति कम होने तथा क्षेतीजीय पवन प्रवाह के कारण शांत वातावरण रहता है, इसलिए इसे डोलड्रम या शांत पेटी या शांत कटिबंध कहते हैं।

कटिबंध में प्रतिदिन वर्षा होती है
अतः इसका भी प्रभाव वायुदाब पर पड़ता है अतः यहां उर्ध्वाधर पवने रहती हैं।

इस क्षेत्र में दोनों गोलार्द्धों में स्थित उपोषण कटिबंध से आने वाली व्यापारिक पवनों का मिलन या अभिसरण होता है अतः इस मेखला को अंतःउष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) भी कहते हैं।

2- उपोषण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी या घोड़े का अक्षांश (अश्व अक्षांश)-

विषुवत रेखा के दोनों ओर 30 डिग्री से 35 डिग्री अक्षांशों के मध्य यह पेटी स्थित है।
यहां प्रायः वर्ष भर उच्च तापमान, उच्च वायुदाब एवं मेघ रहित आकाश पाया जाता है।

इस पेटी की मुख्य विशेषता यह है कि विश्व के सभी उष्ण मरुस्थल इसी पेटी में महाद्वीपों के पश्चिमी किनारों पर स्थित हैं।

यह पेटी उच्च वायुदाब तथा तापमान से संबंधित ने होकर पृथ्वी की दैनिक गति से संबंधित है (वायुदाब के अवतलन से संबंधित) अधिकांश मरुस्थल इसी पेटी में आते हैं।

इस कटिबंध में नीचे उतरती हुई वायु काफी दबाव डालती है जिस कारण से इस क्षेत्र को घोड़े का अक्षांश या अश्व अक्षांश के नाम से भी जाना जाता है।

अधोध्रुवीय/उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी-वायुदाब, परिभाषा, पेटियां, ISOBAR

यह पेटी 60 डिग्री से 65 डिग्री उत्तरी व दक्षिणी अक्षांशों के मध्य स्थित है।
यहां निम्न तापमान तथा निम्न वायुदाब पाया जाता है। जिसका कारण पृथ्वी की घूर्णन गति है।

पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न अपकेंद्रीय बल के कारण दोनों गोलार्द्धों में इस पेटी का निर्माण होता है, जो की गतिजन्य वायुदाब पेटी है।
चक्रवात और तूफानों का जन्म इसी पेटी में होता है।
उत्तरी और दक्षिणी गोलार्धों में इन्हें क्रमशः उत्तरी अधोध्रुवीय निम्नदाब पेटी और दक्षिणी अधोध्रुवीय निम्नदाब पेटी कहते हैं।
इन पेटियों में ध्रुवों और उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्रों में पवनें आकर मिलती हैं और ऊपर उठती हैं।
इन आने वाली पवनों के तापमान और आर्द्रता में बहुत अन्तर होता है।
इस कारण यहाँ चक्रवात या निम्न वायुदाब की दशायें बनती हैं।
निम्न वायुदाब के इस अभिसरण क्षेत्र को ध्रुवीय वाताग्र भी कहते हैं।

ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी-

ध्रुवीय प्रदेशों में तापमान की कमी के कारण इस पेटी का निर्माण होता है जो कि एक तापजन्य पेटी है। इस पेटी में गुरुत्वाकर्षण बल सर्वाधिक होता है।

स्थलीय भागों में दिन में न्यूनतम वायुदाब और सागरों में उच्च वायुदाब तथा रात्रि में इसके विपरीत स्थिति होती है।

ध्रुवीय क्षेत्रों में सूर्य कभी सिर के ऊपर नहीं होता।

यहाँ सूर्य की किरणों का आपतन कोण न्यूनतम होता है इस कारण यहां सबसे कम तापमान पाये जाते हैं।

निम्न तापमान होने के कारण वायु सिकुड़ती है और उसका घनत्व बढ़ जाता है, जिससे यहां उच्च वायुदाब का क्षेत्र बनता है उत्तरी गोलार्द्ध में इसे उत्तर ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी और दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी कहा जाता है।

इन पेटियों से पवनें अधोध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटियों की ओर चलती हैं।

उपर्युक्त वायुदाब चित्र में वायुदाब पेटियां दिखाई गई है जिसका निर्माण सूर्य की दिन की आदर्श स्थिति अर्थात विषुवत रेखा पर होती है तो संपूर्ण पृथ्वी पर 21 मार्च और 23 सितंबर को यह स्थिति निर्मित होती है, जिसे वायुदाब की आदर्श स्थिति कहा जाता है।

अंततः – वायुदाब, परिभाषा, पेटियां, ISOBAR

वायुदाब पेटियों की प्रस्तुत व्यवस्था एक सामान्य तस्वीर प्रदर्शित करती है।
वास्तव में वायुदाब पेटियों की यह स्थिति स्थायी नहीं है।
सूर्य की आभासी गति कर्क वृत्त और मकर वृत्त की ओर होने के परिणाम स्वरूप ये पेटियाँ जुलाई में उत्तर की ओर, और जनवरी में दक्षिण की ओर खिसकती रहती हैं।
तापीय विषुवत रेखा जो सर्वाधिक तापमान की पेटी है, वह भी विषुवत वृत्त से उत्तर और दक्षिण की ओर खिसकती रहती है।
तापीय विषुवत रेखा के ग्रीष्म ऋतु में उत्तर की ओर और शीत ऋतु में दक्षिण की ओर खिसकने के परिणाम स्वरूप सभी वायुदाब पेटियां भी अपनी औसत स्थिति से थोड़ा उत्तर या थोड़ा दक्षिण की ओर खिसकती रहती हैं।

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जो सर्वाधिक तापमान की पेटी है, वह भी विषुवत वृत्त से उत्तर और दक्षिण की ओर खिसकती रहती है।
तापीय विषुवत रेखा के ग्रीष्म ऋतु में उत्तर की ओर और शीत ऋतु में दक्षिण की ओर खिसकने के परिणाम स्वरूप सभी वायुदाब पेटियां भी अपनी औसत स्थिति से थोड़ा उत्तर या थोड़ा दक्षिण की ओर खिसकती रहती हैं।

वायुदाब

पवनें

वायुमण्डल

चट्टानें अथवा शैल

जलवायु

चक्रवात-प्रतिचक्रवात

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