सम्बन्ध सूचक अव्यय Sambandh Suchak Avyay

सम्बन्ध सूचक Sambandh Suchak अव्यय

सम्बन्ध सूचक अव्यय Sambandh Suchak Avyay | परिभाषा | भेद | उदाहरण | संबंध सूचक किसे कहते हैं | सम्बन्ध सूचक अव्यय के वाक्य प्रयोग के आधार पर हिन्दी में शब्दों के दो भेद किए जाते हैं।

विकारी (Vikari Shabad)

विकारी शब्द वे शब्द होते हैं, जिनका रूप लिंग, वचन, कारक और काल के अनुसार परिवर्तित हो जाता है, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं विकारी शब्दों में समस्त संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण तथा क्रिया शब्द आते हैं।

अविकारी या अव्यय शब्द (Avikari Shabad)

अविकारी या अव्यय शब्द वे शब्द होते हैं, जिनके रूप में लिंग, वचन, कारक, काल के अनुसार कोई विकार उत्पन्न नहीं होता अर्थात् इन शब्दों का रूप सदैव वही बना रहता है। ऐसे शब्दों को अविकारी या अव्यय शब्द कहते हैं। अविकारी शब्दों में क्रियाविशेषण, सम्बन्धबोधक अव्यय, समुच्चय बोधक अव्यय तथा विस्मयादिबोधक अव्यय आदि शब्द आते हैं। विस्तृत विवरण इस प्रकार है-

सम्बन्ध सूचक Sambandh Suchak अव्यय

वे अव्यय शब्द जो किसी संज्ञा शब्द (अथवा संज्ञा के समान उपयोग में आनेवाले शब्द) के आगे आकर उसका संबंध वाक्य के किसी दूसरे शब्द के साथ स्थापित करते हैं उसे संबंध सूचक कहते हैं। जैसे –

पानी के बिना जीवन नहीं है।

धन के बिना किसी का काम नही चलता।

रमेश दूर तक गया।

दिन भर घूमना अच्छा नहीं होता।

इन वाक्य में ‘बिना’, ‘तक’ और ‘भर’ सबंधसूचक हैं।

‘बिना’ पद ‘धन’ संज्ञा का संबंध ‘चलता’ क्रिया से मिलाता है।

‘तक’, ‘रमेश’ का संबंध ‘गया’ से मिलाता है;

‘भाग’, ‘दिन’ का संबंध ‘घूमना’ क्रियार्थक संज्ञा के साथ जोड़ता है।

कतिपय कालवाचक और स्थानवाचक अव्यय क्रियाविशेपण भी होते हैं और संबंधसूचक भी – जब वे स्वतंत्र रूप से क्रिया की विशेषता बताते हैं तब उन्हें क्रियाविशेषण कहते हैं, परंतु जब उनका प्रयोग संज्ञा के साथ होता है तब वे संबंधसूचक कहलाते हैं। जैसे-

शिष्य यहाँ रहता है। (क्रिया विशेषण)

शिष्य गुरु के यहाँ रहता है। (संबंध सूचक)

वह काम पहले करना चाहिए। (क्रिया विशेषण)

यह काम जाने से पहले करना चाहिए। (संबंध सूचक)

सम्बन्ध सूचक अव्यय Sambandh Suchak Avyay के भेद

(1) प्रयोग के आधार पर
(2) अर्थ के आधार पर
(3) व्युत्पत्ति के आधार पर

(1) प्रयोग के अनुसार सम्बन्ध सूचक अव्यय Sambandh Suchak Avyay

प्रयोग के अनुसार संबंधसूचक दो प्रकार के होते हैं-

(अ) संबद्ध संबंधसूचक- संज्ञा की विभक्तियों के आगे आते हैं, जैसे, धन के बिना, नर की नाई, पूजा से पहले, इत्यादि।

(आ) अनुबद्ध संबंधसूचक- संज्ञा के विकृत रूप के साथ आते हैं, जैसे, किनारे तक, सखियों सहित, कटोरा भर, पुत्रों समेत, लड़के सरिखा, इत्यादि।

(2) अर्थ के अनुसार सम्बन्ध सूचक अव्यय Sambandh Suchak Avyay

इनका वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार से किया जाता है –

कालवाचक – आगे, पीछे, वाद, पहले, पूर्व, अनंतर, पश्चात्, उपरांत, लगभग।

स्थानवाचक – आगे, पीछं, ऊपर, नीचे, तले, सामनं, रूबरू, पास, निकट, समीप, नज़दीक, यहाँ, बीच, बाहर, परे, दूर, भीतर।

दिशावाचक – ओर, तरफ, पार, आर पार, आसपास, प्रति।

साधन वाचक – द्वारा, जरिया, हाथ, मारफत, वल, करके, जवानी, सहारे।

हेतुवाचक – लिए, निमित्त, वास्ते, हेतु, हित, खातिर, कारण, सबवे, मारे।

विषयवाचक – बाबत, निस्वत, विषय, नाम (नामक), लेखे, जान, भरोसे, मद्धे।

व्यतिरेकवाचक – सिवा (सिवा), अलावा, बिना, बगैर, अतिरिक्त, रहित।

विनिमय वाचक – पलटे, बदले, जगह, एवज, संती।

सादृश्य वाचक – समान, सम (कविता में), तरह, भाँति, नाई, बराबर, तुल्य, योग्य, लायक, सदृश, अनुसार, अनुरूप, अनुकूल, देखा-देखी, सरिता, सा, ऐसा, जैसा।

विरोधवाचक – विरुद्ध, खिलाफ, उलटा, विपरीत।

सहचारण वाचक – सग, साथ, समेत, सहित, पूर्वक, अधीन, अधीन, वश।

संग्रहवाचक – तक, लौं, पर्यंत, सुद्धा, भर, मात्र।

तुलनावाचक – अपेक्षा, बनिस्बत, आगे, सामने ।

[विशेष – ऊपर की सूची में जिन शब्दों को कालवाचक संबंधसूचक लिखा है वे किसी किसी प्रसंग में स्थानवाचक अथवा दिशावाचक भी होते है। इसी प्रकार और भी कई एक संबंध सूचक अर्थ के अनुसार एक से अधिक वर्गों में आ सकते हैं।]

(3) व्युत्पत्ति के अनुसार सम्बन्ध सूचक अव्यय Sambandh Suchak Avyay

व्युत्पत्ति के अनुसार संबंध सूचक दो प्रकार के हैं-

(1) मूल संबंध सूचक – हिंदी में मूल संबंध सूचक बहुत कम हैं, जैसे, बिना, पर्यंत, नाई, पूर्वक, इत्यादि।

(2) यौगिक सबधसूचक – किसी संज्ञा, विशेषण, क्रिया, क्रियाविशेषण आदि से बनते हैं, जैसे –

संज्ञा से – पलटे, वास्ते, और, अपेक्षा, नाम, लेखे, विषय, मारफत, इत्यादि।

विशेपण से – तुल्य, समान, उलटा, जबानी, सरीखा, योग्य, जैसा, ऐसा, इत्यादि।

क्रिया विशेषण से – ऊपर, भीतर, यहाँ, वाहन, पास, परे, पीछे, इत्यादि।

क्रिया से – लिये, मारे, करके, जान।

स्रोत – हिंदी व्याकरण – पं. कामताप्रसाद गुरु

इन्हें भी अवश्य पढ़िए-

लिंग (व्याकरण)

सम्बन्ध सूचक अव्यय Sambandh Suchak Avyay

विस्मयादिबोधक अव्यय Vismayadibodhak Avyay

भाषा व्याकरण

वचन

समास

संज्ञा

विशेषण

क्रिया विशेषण

कारक

स्वर सन्धि

व्यंजन संधि

विसर्ग सन्धि

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