रसखान

रसखान जीवनी और साहित्य

रसखान के जीवन परिचय, जीवनी और संपूर्ण साहित्य, सवैया, कवित्त, सोरठे, दोहे एवं विशेष तथ्यों पर इस आलेख में प्रकाश डाला गया है।

आशा है कि आपको यह आलेख पसंद आएगा।

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जीवनी

पूरा नाम- सैय्यद इब्राहीम (रसखान)

जन्म- सन् 1533 से 1558 बीच (लगभग)

जन्म भूमि- पिहानी, हरदोई ज़िला, उत्तर प्रदेश

कर्म भूमि- महावन (मथुरा)

मृत्यु- सन् 1628 के आसपास

विषय- सगुण कृष्णभक्ति
नोट:- हिंदी कृष्ण भक्त मुस्लिम कवियों में रसखान का स्थान सबसे ऊपर है।

रसखान जीवनी और साहित्य
रसखान जीवनी और साहित्य

 

रसखान जीवनी और साहित्य

रचनाएं

रसखान जीवनी, संपूर्ण साहित्य, सवैया, कवित्त, सोरठे, दोहे एवं विशेष तथ्यों पर इस आलेख में प्रकाश डाला गया है।

सुजान रसखान- स्फुट पदो का संग्रह है, जिसमे 181 सवैये, 17 कवित्त, 12 दोहे तथा 4 सोरठे है|

प्रेमवाटिका- इसमें 53 दोहे है|

दानलीला- इसमे 11 दोहे है|

अष्टयाम

रसखान : जीवनी और साहित्य

विशेष तथ्य

शिवसिंह सरोज तथा हिंदी साहित्य के प्रथम इतिहास तथा ऐतिहासिक तथ्यों एवं अन्य पुष्ट प्रमाणों के आधार पर रसखान की जन्म-भूमि पिहानी ज़िला हरदोई माना जाए।

अब्राहम जार्ज ग्रियर्सन ने लिखा है सैयद इब्राहीम उपनाम रसखान कवि, हरदोई ज़िले के अंतर्गत पिहानी के रहने वाले, जन्म काल 1573 ई.।

यह पहले मुसलमान थे। बाद में वैष्णव होकर ब्रज में रहने लगे थे। इनका वर्णन ‘भक्तमाल’ में है।

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने जिन मुस्लिम हरिभक्तों के लिये कहा था, “इन मुसलमान हरिजनन पर कोटिन हिन्दू वारिए” उनमें रसखान का नाम सर्वोपरि है।

जन्म- स्थान तथा जन्म काल की तरह रसखान के नाम एवं उपनाम के संबंध में भी अनेक मत प्रस्तुत किए गए हैं।

हजारी प्रसाद द्विवेदी जी ने अपनी पुस्तक में रसखान के दो नाम लिखे हैं:- सैय्यद इब्राहिम और सुजान रसखान, जबकि सुजान रसखान की एक रचना का नाम है। हालांकि रसखान का असली नाम सैयद इब्राहिम था और “खान’ उसकी उपाधि थी।

रसखान के जीवन परिचय, साहित्य, संपूर्ण साहित्य, सवैया, कवित्त, सोरठे, दोहे एवं विशेष तथ्यों पर इस आलेख में प्रकाश डाला गया है।

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तुलसीदास- https://thehindipage.com/bhaktikaal-ke-sahityakaar/tulsidas/

विकिपीडिया लिंक- https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A8

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